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महिला एवं बाल विकास विभाग का एक्शन: 6 सप्लाई एजेंसियों पर प्रतिबंध, घटिया सप्लाई का खुलासा

रायपुर। राज्य में आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए भेजी गई सामग्रियों की गुणवत्ता पर उठे सवालों को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने तत्काल और सख्त रुख अपनाया है। उनके निर्देश पर राज्य स्तरीय जांच समिति गठित की गई, जिसने 6 जिलों में जाकर भौतिक परीक्षण किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।

जांच समिति में संयुक्त संचालक (वित्त), सीएसआईडीसी, जीईसी रायपुर के तकनीकी विशेषज्ञ, संबंधित जिलों के अधिकारी, और SGS इंडिया व IRCLASS सिस्टम्स जैसी तकनीकी निरीक्षण एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल थे। समिति ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जशपुर, सरगुजा और जांजगीर-चांपा जिलों में जाकर सप्लाई की गई सामग्रियों की गुणवत्ता का गहन परीक्षण किया।

दोषी एजेंसियों पर कार्रवाई:

जांच के बाद छह प्रदायकर्ता एजेंसियों —

  • मेसर्स नमो इंटरप्राइजेस
  • मेसर्स आयुष मेटल
  • मेसर्स अर्बन सप्लायर्स
  • मेसर्स मनीधारी सेल्स
  • मेसर्स ओरिएंटल सेल्स

मेसर्स सोनचिरैया कॉर्पोरेशन
को गंभीर दोषी पाए जाने पर GeM पोर्टल से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अब ये एजेंसियाँ भविष्य में किसी भी प्रकार की शासकीय आपूर्ति नहीं कर पाएंगी।

गुणवत्ता के अनुसार सप्लाई कराई गई

विभाग ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2024-25 में GeM पोर्टल के माध्यम से 23.44 करोड़ रुपये की सामग्री खरीदी गई थी, न कि 40 करोड़ जैसी कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया। विभाग ने सभी सामग्रियों की आपूर्ति से पहले और बाद में गुणवत्ता जांच कराई। घटिया सामग्री के लिए किसी भी एजेंसी को भुगतान नहीं किया गया है। भुगतान केवल गुणवत्ता परीक्षण पास होने के बाद ही किया जाता है।

मंत्री राजवाड़े का सख्त संदेश

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा, “बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हमने तत्परता और पारदर्शिता के साथ जांच पूरी की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि आंगनबाड़ी केंद्रों तक केवल सुरक्षित, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण सामग्री ही पहुंचे।”

यह कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की “जीरो टॉलरेंस नीति” और राज्य सरकार की पारदर्शी एवं उत्तरदायी प्रशासनिक व्यवस्था का जीवंत उदाहरण है, जिसमें बच्चों और महिलाओं के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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